प्रयागराज: महाकुंभ मेले में मौनी अमावस्या के दिन एक बड़ा हादसा हुआ। मंगलवार और बुधवार को रात्री संगम तट पर भगदड़ मच गई जिसमे 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हो गए। लोगो की भारी भीड़ के कारण बैरिकेडिंग टूट गया जिस कारण यह हादसा हुआ। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं।
महाकुंभ में कैसे हुआ हादसा ?
महाकुंभ में स्नान के लिए करोड़ों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचे थे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि सुरक्षा व्यवस्था गड़बड़ा गई। भीड़ ज्यादा होने के कारण अचानक कुछ श्रद्धालु जमीन पर गिर गए, जिससे भगदड़ मच गई। भगदड़ में कई लोग कुचले गए साथ ही कुछ लोगों का दम घुटने के कारण मृत्यु हो गई।
DIG का महाकुंभ हादसे पर बयान
घटना के बाद DIG वैभव कृष्ण ने बताया कि अब तक 30 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से यूपी के 19 लोग है, कर्नाटक के 4 लोग और गुजरात व असम के 1-1 । अब तक 25 मृतकों की पहचान कर ली गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे को लेकर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है।
महाकुंभ हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
महाकुंभ हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हादसे के बारे बातचीत की ओर हालात की जानकारी ली। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ समय के लिए अखाड़ों के स्नान पर रोक लगा दी थी, कुछ समय बाद में स्थिति सामान्य होने पर स्नान फिर से शुरू कर दिया गया।
महाकुंभ हादसा क्या प्रशासन की लापरवाही ?
महाकुंभ मेले में स्नान के लिए लाखों भगतो के पहुंचने का अनुमान था, पता होने के बाद भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए गए । बैरिकेडिंग कमजोर थी, जिस कारण भीड़ बेकाबू हो गई। हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, लेकिन लोग सवाल उठ रहे हैं कि पहले ही पता होने के बाद भी सुरक्षा के साथ इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे के बाद जांच के आदेश दिए हैं। मेले में भीड़ नियंत्रण के लिए और पुलिस बल तैनात किया गया है । प्रशासन ने भगतो से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और शांति से नियमों का पालन करें।